Follow by Email

शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

मुस्कुराते रहो-

मुस्कुराते रहो-
मनहूसियत छोड़ करके मुस्कुराना सीखिए|
रूठना, मनना, मनाना, मानजाना सीखिए |
देर तक यूँ गमजदा रह भी न पाओगे ज़नाब,
'शलभ'कीइनमहफ़िलोंमेंखिलखिलानासीखिए| रोहितश्याम चतुर्वेदी 'शलभ'

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें