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शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

मुस्कुराते रहो-

मुस्कुराते रहो-
मनहूसियत छोड़ करके मुस्कुराना सीखिए|
रूठना, मनना, मनाना, मानजाना सीखिए |
देर तक यूँ गमजदा रह भी न पाओगे ज़नाब,
'शलभ'कीइनमहफ़िलोंमेंखिलखिलानासीखिए| रोहितश्याम चतुर्वेदी 'शलभ'

गुरुवार, 26 नवंबर 2009

हम वन्देमातरम गायेंगे

HAM VANDEMATARAM GAYENGE----

बन्दे है तेरे मौला मेरे कुर्बां तुझपे हम जायेंगे|
वतन हमारा अक्स तेरा हम वन्देमातरम गायेंगे|
सुजलाम-सुफलाम की यह धरती,
मलयज सी शीतल हवा बहे|
शातिर ही नहीं काफ़िर भी है वो,
तू नहीं यहाँ ऐसा जो कहे|
इस पाक जमीं पर सर रखकर हम निहाल हो जायेंगे|
वतन हमारा अक्स तेरा हम वन्देमातरम गायेंगे|
इस चाँद सी रोशन रातों में,
इक तुझसे ही तो रवानी है|
फूलों की महक भवरों की गमक,
सब तेरी ही तो कहानी है|
ग़म लेकर देने वाले ख़ुशी तुझको हम भूल न पाएंगे|
वतन हमारा अक्स तेरा हम वन्देमातरम गायेंगे|
जब जन्म लिया इस मिटटी में,
तब उसकी ख़िलाफ़त कैसे करें?
है हिंद हमें जां से प्यारा,
फिर क्यों न हिफ़ाजत इसकी करें|
जिस माँ का दूध पिया हमने उसका हम कर्ज चुकायेंगे|
वतन हमारा अक्स तेरा हम वन्देमातरम गायेंगे|
दहशत-गर्दी हो ख़त्म बढ़े,
सबओर यहाँ पर चैनोअमन|
इक तेरी निगहबानी में खुदा,
खुशहाल रहे मादरेवतन|
नेकी की राह चलें हैं तो हम नेक यकीं बनपायेंगे|
वतन हमारा अक्स तेरा हम वन्देमातरम गायेंगे|

dr. Rohit shyam Chaturvedi "shalabh"