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गुरुवार, 7 जुलाई 2011

A preview of Gmail’s new look - Official Gmail Blog

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1 टिप्पणी:

  1. गायत्री
    ब्रम्ह की इच्छा,शक्ति एवं क्रिया ही गायत्री है|
    उसी से जगत की उत्पत्ति,विकास तथा अवसान
    का आयोजन होता है|सुन्दरता,मधुरता ,संपत्ति,कीर्ति,
    आशा,प्रसन्नता,करुणा,मैत्री आदि के रूप में यह
    महाशक्ति ही जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को आनंदित एवं
    तरंगित करती रहती है|इस विश्वनारी की,महामाता की,
    महाविद्या की,महागायत्री की आराधना करके हम अधिकाधिक
    आनंद की ओर अग्रसर हो सकते हैं|परमानंद को प्राप्त करने का
    यही शाश्वत मार्ग है |
    पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य

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